छत्तीसगढ़
आदेशों की अवहेलना पर हाईकोर्ट ने 2 IAS अधिकारियों को किया तलब
Shantanu Roy
14 Nov 2025 8:34 PM IST

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छग
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में शासन स्तर पर न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना अब भारी पड़ने लगी है। इसी सिलसिले में राज्य के दो वरिष्ठ IAS अफसर- मनोज कुमार पिंगुआ और किरण कौशल—की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों को अवमानना मामले में तलब करते हुए सोमवार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जमानती वारंट भी जारी कर दिया है। पूरा मामला एक कॉलेज के डिमॉन्स्ट्रेटर से जुड़े विवाद का है। याचिकाकर्ता एक शासकीय कर्मचारी है, जिसने अपने अभ्यावेदन पर कार्रवाई न होने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि राज्य शासन याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार विचार कर आवश्यक आदेश पारित करे।
हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद याचिकाकर्ता द्वारा कई बार अभ्यावेदन और स्मरण पत्र दिए जाने के बाद भी शासन स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। नतीजतन, याचिकाकर्ता ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाते हुए दोनों IAS अधिकारियों पर अवमानना याचिका दायर की। शुक्रवार को इस अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने शासन की लापरवाही और आदेश के अनुपालन में देरी को गंभीर मानते हुए नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कोर्ट के स्पष्ट आदेशों की अनदेखी न्याय व्यवस्था के प्रति असम्मान दर्शाती है, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जब न्यायालय आदेश पारित करता है।
अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि उसे समय पर और पूरी निष्ठा से लागू करें। आदेश पालन में लगातार लापरवाही अदालत की अवमानना की श्रेणी में आती है, इसलिए अभियुक्त अधिकारियों को अदालत में उपस्थित होना आवश्यक है। अवमानना अधिनियम, धारा 12 के तहत यह प्रावधान है कि अवमानना में दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति पर 2,000 रुपये तक का जुर्माना, छह महीने की सजा, या दोनों सजा एक साथ दी जा सकती हैं। इसी प्रावधान के तहत अदालत ने IAS मनोज पिंगुआ और IAS किरण कौशल को नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट के रुख से यह स्पष्ट है कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा न्यायालय के आदेशों की अनदेखी को अब सहन नहीं किया जाएगा। यह मामला शासन में कार्यरत अधिकारियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है कि न्यायालय के निर्देश सर्वोपरि हैं और उनके पालन में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी। अब सोमवार को दोनों IAS अफसरों की हाईकोर्ट में उपस्थिति और उनके जवाब पर अदालत अगली कार्रवाई तय करेगी।
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